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Biogas Plant Sangrur: शुरू हुआ एशिया का सबसे बड़ा बायोगैस प्लांट 2022

Biogas Plant Sangrur: दोस्तों भारत में एशिया का सबसे बड़ा बायोगैस प्लांट शुरू हुआ है। यह बायोगैस प्लांट पंजाब के संगरूर में लगा है। इस प्लांट में बड़ी मात्रा में पराली का कच्चे माल के रूप में उपयोग होगा।

Biogas Plant Sangrur: दोस्तों भारत में एशिया का सबसे बड़ा बायोगैस प्लांट शुरू हुआ है। यह बायोगैस प्लांट पंजाब के संगरूर में लगा है। इस प्लांट में बड़ी मात्रा में पराली का कच्चे माल के रूप में उपयोग होगा। पराली से जो कंप्रेस्ड बायोगैस बनेगी, उसका उपयोग CNG की तरह गाड़ी चलाने और LPG की तरह खाना पकाने में हो सकेगा। यह प्लांट 23 एकड़ में फैला हुआ है। इस प्लांट से 600 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। एक जर्मन कम्पनी ने यह बायोगैस प्लांट शुरू किया है। इस बायोगैस प्लांट का सबसे बड़ा फायदा पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकने में होगा। हरियाणा और पंजाब में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है।

Biogas Plant Sangrur बता दे की पंजाब हरियाणा में कई हफ्तों तक पराली जलती रहती है। इसका धुआं दिल्ली-एनसीआर में फैलता है। दिल्ली में वायु प्रदुषण बढ़ने के कारण देशभर में पराली जलाने पर प्रतिबंध है। लेकिन किसानों का कहना है कि धान की कटाई के बाद बचे ठंठ के निस्तारण के लिए उनके पास कोई किफायती उपाय नहीं है। ऐसे में इसे जलाना ही पड़ता है। संगरूर के कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट से बड़े पैमाने पर पराली का कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। Biogas Plant Sangrur

Biogas Plant Sangrur: कैसे काम करेगा बायो गैस प्लांट

Biogas Plant Sangrur बायो गैस प्लांट में कन्वेयर बेल्ट के जरिए पराली के भारी गट्ठरों को क्रशिंग मशीन में भेजा जाएगा। यह क्रशिंग मशीन पराली को बुरादे में बदलेगी। इसके बाद भारी-भरकम कंटेनरों में इस बुरादे को गोबर के पानी के साथ मिला कर रखा जाता है। इससे बैक्टीरिया के जरिए बायोगैस बनाई जाती है। इस तरह पराली से बायो गैस बनती है। इस बायो गैस को कंप्रेस्ड करके सीएनजी की तरह गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बायोगैस प्लांट से क्या होगा फायदा


दोस्तों यह बायोगैस प्लांट किसानों की इनकम भी बढ़ाएगा। किसान जब पराली को प्लांट में देंगे, तो उन्हें इसके बदले में पैसे भी मिलेंगे। खास बात यह है कि खेतों से पराली के गट्ठर तैयार करके इसे प्लांट तक लाने की पूरी जिम्मेदारी प्लांट की ही होती है। बता दें कि इस प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन अगस्त से शुरू हो चुका है। यह प्लांट इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड को कंप्रेस्ड बायो गैस की आपूर्ती कर रहा है। Biogas Plant Sangrur

कितनी है प्लांट की क्षमता


बायोगैस प्लांट में रोजाना 300 टन पराली से 33 टन कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जा सकती है। वर्तमान में यह प्लांट 702 टन पराली से 8 टन बायोगैस तैयार कर रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि जल्द ही इस प्लांट से पूरी 33 टन गैस रोजाना खरीदी जाएगी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों से किया पराली न जलाने का आग्रह

भगवंत मान ने कहा कि किसान लंबे समय से पराली नहीं, बल्कि नोटों को जला रहे थे, क्योंकि पराली से ही बायो गैस ही नहीं बनती बल्कि खाद भी तैयार की जा रही है। लहरागागा यूनिट में भी पराली से खाद भी बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष में कुल 75 लाख एकड़ में धान की बिजाई हुई है। इसमें से 37 लाख एकड़ की पराली नहीं जलाई जाती। 50 फीसद किसान पराली जलाते हैं। इन किसानों से आग्रह है कि वे पराली न जलाकर पर्यावरण के संरक्षण में योगदान डालें।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि प्लांट के 14.25 टन सीबीजी प्रतिदिन क्षमता वाले दो अन्य यूनिटें भी वर्ष 2022-23 तक मुकम्मल हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 20 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्लांट की 550 टन सीबीजी प्रति वर्ष उत्पादन की क्षमता है। उन्होंने कहा कि तीनों यूनिटें सही तरीके से काम करने लगेंगी तो पंजाब में ऐसे 10 और बायो गैस प्लांट लगाए जाएंगे।

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