राष्ट्रीयराजनीति

‘भारत जोड़ो यात्रा’ से Rahul Gandhi के सिर से हटा pappu का टैग ?

Rahul Gandhi: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा समाप्‍त हो चुकी है,, पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से यह यात्रा शुरू हुई थी। 136 दिनों की इस यात्रा में Rahul Gandhi ने जनता से सीधे संपर्क किया।


Rahul Gandhi: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा समाप्‍त हो चुकी है,, पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से यह यात्रा शुरू हुई थी। 136 दिनों की इस यात्रा में Rahul Gandhi ने जनता से सीधे संपर्क किया। लोग बढ़चढ़कर उनकी यात्रा में शामिल हुए। समाज के अलग-अलग तबकों से उनकी समस्याओं पर चर्चा की। ऐसे में सवाल लाजिमी हैं कि क्या भारत जोड़ो यात्रा अपना लक्ष्य हासिल करने में सफल रही? इस यात्रा से Rahul Gandhi और कांग्रेस पार्टी को क्या फायदा हुआ है? क्‍या राहुल की यात्रा कांग्रेस के लिए वोट भी लेकर आएगी? यात्रा से Rahul Gandhi की छवि इससे कितनी बदलेगी? विपक्ष को एकजुट कर पाने में यह यात्रा कितनी सफल होगी? इसी बारे में आज हम अपनी इस वीडियों में चर्चा करेंगें

विपक्ष को मज़बूत होने के लिए लोगों के बीच जाना होगा

देखिये दोस्तों इस यात्रा से सबसे पहली बात तो ये स्पष्ट हुई है कि अभी भारत में विपक्ष की जगह ख़त्म नहीं हुई है,, विपक्ष की जगह अभी भी बरक़रार है, लेकिन विपक्ष को मज़बूत होने के लिए लोगों के बीच जाना होगा और उनसे बात करनी होगी.
पिछले आठ साल में एक तरह से बीजेपी मीडिया में हावी थी या बीजेपी का एकाधिकार था. मीडिया में बात बीजेपी से शुरू होकर बीजेपी पर ही ख़त्म होती थी. लेकिन राहुल ने भारत जोड़ो यात्रा के ज़रिए लोगों के बीच जाकर ये साबित कर दिया है कि विपक्ष भी अपनी जगह बना सकता है. दोस्तों भारत जोड़ो यात्रा को सिर्फ़ क्षेत्रीय मीडिया ने ही नहीं,,बल्कि नेशनल मीडिया ने भी राहुल गांधी की कवरेज की है और राहुल दिखाई देने लगे

Rahul Gandhi ने खुद पर लगे “पप्पू” टैग को हटा लिया

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान Rahul Gandhi ने अपने आप को जिस तरह से पेश किया, वो काबिलेतारीफ थी Rahul Gandhi का लोगों के साथ उनका सहज व्यवहार. चाहे कोई बुजुर्ग महिला हो या छोटा बच्चा हो,,या कोई किसान हो या मजदूर हो, राहुल गांधी ने सभी का दिल जीत लिया, इस यात्रा से सबसे बड़ी सफलता ये मिली की आखिरकार Rahul Gandhi ने खुद पर लगे “पप्पू” टैग को हटा लिया,,जो कि बीजेपी द्वारा उन पर चिपकाया गया था,,खासकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को उन्होंने यह दिखा दिया कि वे कोई अनिच्छुक पार्ट टाइम राजनेता नहीं है, जैसा कि पहले उन्हें दिखाने की कोशिश की जाती थी

चंद्रशेखर की पदयात्रा के बाद ये कोई पहली पदयात्रा हुई है

दोस्तों Rahul Gandhi ने एक बहुत बड़ा काम किया है. आज़ाद भारत में चंद्रशेखर की पदयात्रा के बाद ये कोई पहली पदयात्रा हुई है,, Rahul Gandhi ने इस यात्रा के ज़रिए उन सभी सवालों को ख़ारिज कर दिया है जो उन पर उठते रहे थे. पहले कहा जाता था कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद नहीं छोड़ेंगे, उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ा, फिर कहा गया कि वो ख़ुद अध्यक्ष बन जाएंगे, लेकिन वो नहीं बने, इसके बाद कहा गया कि अध्यक्ष के चुनाव को टाल दिया जाएगा, लेकिन वो भी नहीं टाला गया. ऐसा कुछ नहीं हुआ और Rahul Gandhi ने जो काम करना तय किया था, वो उसमें लगे रहे और उसे पूरा किया.

Rahul Gandhi ने एक मज़बूत और गंभीर नेता की छवि बनाई है

दोस्तों भारत जोड़ो यात्रा के ज़रिए Rahul Gandhi ने एक मज़बूत और गंभीर नेता की छवि बनाई है. बीजेपी और सोशल मीडिया ट्रोल ने Rahul Gandhi की अलग छवि बनाई थी. पहले राहुल गांधी का मज़ाक बनाते हुए मीम सोशल मीडिया पर शेयर किए जाते थे. अब ये मीम कम हो गए हैं और राहुल गांधी के लिए पॉजिटिव कंटेंट सोशल
मीडिया पर बढ़ गया है. दोस्तों अफ़्रीका से लौटने के बाद जब गांधी जी भारत आए थे तब उन्होंने भी भारत में यात्राएं कीं और देश को समझा,,ऐसे ही भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल गांधी को,, देश को समझने का मौका दिया,,राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के मज़बूत नेतृत्व के सामने एक ताक़तवर विकल्प के रूप में खड़े होने की कोशिश भी इस यात्रा के ज़रिए की ,,अगर राहुल गांधी को बराबर का नेता ना भी कहें,,तब भी अब वो कतार में तो आ ही गए हैं. अब लोग राहुल गांधी को गंभीरता से ले रहे हैं.

इस यात्रा से कांग्रेस पार्टी को नई जान मिली है

दोस्तों भले ही मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं, लेकिन पार्टी के नेता राहुल गांधी ही हैं,,इसके अलावा राहुल गांधी विपक्ष के नेताओं में भी आगे निकल गए हैं. अब तक चाहे ममता बनर्जी हों या अरविंद केजरीवाल, वो सभी राहुल गांधी की गंभीरता पर सवाल उठाते रहे थे. आज उन सभी को लग रहा है कि Rahul Gandhi के बिना विपक्ष की एकता मुमकिन नहीं है,,कांग्रेस के कार्यकर्ता भी इस यात्रा के ज़रिए सक्रिय हुए हैं. जिन-जिन राज्यों से ये यात्रा गुज़री है वहां पार्टी और कार्यकर्ता कार्यशील हो गए हैं. एक तरह से कहा जा सकता है इस यात्रा से कांग्रेस पार्टी को नई जान मिली है.

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए कहीं बुरे तो कहीं अच्छे परिणाम लेकर आये थे

दोस्तों साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए कहीं बुरे तो कहीं अच्छे परिणाम लेकर आये थे. कांग्रेस ने 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब को गंवा दिया जहां उसे महज 18 सीटों से संतोष करना पड़ा लेकिन साल के अंत में उसके बदले 68 विधानसभा सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने एक राज्य गंवाया तो दूसरा राज्य पा लिया. इस तरह कांग्रेस के खाते में अब भी तीन राज्य हैं-छत्तीसगढ़, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश,,कांग्रेस पार्टी ने मोदी युग में बीजेपी की लहर के बीच हिमाचल को दोबारा हासिल कर लिया,,जिसका पूरा श्रेय राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा को जाता है

2024 का रास्ता 2023 के नतीजे से ही साफ होने वाला है

दोस्तों इस साल यानी 2023 में सत्ता का सेमीफाइनल है. इस साल जिन नौ राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं, वे हैं – राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम. इनमें दो ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस की सरकार है. मसलन राजस्थान और छत्तीसढ़ दो ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस पार्टी को अपनी सरकार बचाने की चुनौती है. वहीं अगर 2024 के लोकसभा के चुनाव में अगर कांग्रेस को अपनी मजबुूत स्थिति बनानी है तो उसके लिए बाकी के राज्यों में भी पार्टी को अपनी परफॉर्मेंस बेहतर करनी होगी. क्योंकि इसमें कोई दो राय नहीं कि 2024 का रास्ता 2023 के नतीजे से ही साफ होने वाला है.

दोस्तों भारत जोड़ो यात्रा का उत्तर भारत के राज्यों में राहुल गांधी का जिस तरह स्वागत हुआ है, वह बताता है कि बीजेपी ने जो कांग्रेस के खिलाफ नैरेटिव सेट किया था, वो बदल रहा है. राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो ईमानदार, दृढ़ संकल्प और करुणा के प्रतीक हैं. आपका इस बारे में क्या कहना है आप हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर जरूर बताएं और बाकि खबरों के लिए पढ़ते रहिय जनता की आवाज

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